यात्रा

‘विस्लिंग विलेज’…कॉन्गथोंग (मेघालय)

जतिन भारद्वाज II 

भारत देश की अनेक बोली और संस्कृति है जिनसे पूरा देश पूर्ण परिचित नहीं है। अभी भी पारंपरिक सामाजिक ढांचा और परम्पराएं लगभग अपने मूल रूप में हैं जिनके बारे में मुखरित होकर नहीं बोला गया है। अपनी यात्रा के दौरान ऐसे ही एक अनुभव से मैं भी गुजरा। मेघालय आने के बाद यहाँ स्थित एक ऐसे गाँव में जाना हुआ जो भारत ही नहीं बल्कि विश्वभर में अपनी एक अलग संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है और यह गाँव मेघालय से 56 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जिसका नाम है *कॉन्गथोंग*।जिसे *विस्लिंग विलेज* के नाम से भी जाना जाता है। कॉन्गथोंग गाँव की बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ जब कोई लड़का या लड़की का जन्म होता है तो मां उसके लिए अर्थात नाम के संबोधन के लिए एक खास तरीके का धुन तैयार करती है जिसे *जिंगरवाई यावबेई* (अर्थात माँ के द्वारा तैयार किया गया धुन) कहा जाता है

और विशेष बात यह भी है कि यह धुन गाँव में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए निर्मित है और गाँव में रहने वाले लगभग 700 लोगों के लिए अलग-अलग धुन तैयार की गई है।खास बात यह भी है कि जिसके लिए जो धुन बनाई गई है वैसी धुन किसी अन्य के लिए नहीं होती है।

चित्र :साभार गूगल 

इस बात को कहने में कोई गुरेज नहीं कि जब से राज्य सभा सांसद राकेश सिन्हा ने इस गाँव के विकास की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली है और 30 जुलाई 2019 को राज्यसभा में इस गाँव को सांस्कृतिक धरोहर घोषित करने की आवाज उठाई तभी से यह गांव अपनी सांस्कृतिक वैशिष्ट्य अस्तित्व को लेकर प्रकाश में आ पाया है।

इनके विशेष प्रयास से आज गाँव की मूलभूत सुविधाएं धीरे-धीरे अपने रफ्तार की ओर बढ़ रही हैं और इस विस्लिंग विलेज को यूनेस्को ने सांस्कृतिक विरासत की श्रेणी में भी शामिल किया है।आज जरूरत है कि इस अतुलनीय सांस्कृतिक विरासत के सौंदर्य को बचाया जाए ,उसे विस्तार दिया जाए…..उनके द्वारा बनाये गए धुनों के सामाजिक व सांस्कृतिक महत्व को समझा जाए ,उसे संयोजित किया जाए। 

मेघालय के इस गांव को क्या कहा जाए। संगीत की नई धुनों का निर्माण करनेवाली स्त्रियां किसी संगीत विद्यालय या महाविद्यालय में प्रशिक्षण प्राप्त नहीं की हैं फिर वही संतान उत्पत्ति पर एक नई धुन सफलतापूर्वक निर्मित कर लेती हैं। प्रकृति द्वारा प्रदत्त संगीत का यह जन्मजात उपहार मेघालय के इस गांव से संगीत की धुनों का एक विश्वकोश निर्मित करने का सामर्थ्य रखता है। गाँव के कई लोगों से मिलना और उनकी संस्कृति, परम्परा,मूल्य को जानना बहुत ही सुखद रहा ।कुछ प्राकृतिक सुंदरता से सराबोर चित्र… धुन में सम्बोधित करते नाम …..  

About the author

जतिन भारद्वाज

निदेशक
यश पब्लिकेशन , नई दिल्ली

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