काव्यानुवाद

सती (सोनेट)

चित्र साभार गूगल

अनिमा दास II

यह तिथि पूर्णिमा की नहीं, यह निशि भी नहीं नीलांबरी
होती संचरित चतुरपार्श्व चतुर्दशी चंद्रमा की अल्पना
यह चिह्न..नहीं है चुंबन, यह नारी में निःसत्वा ईश्वरी
मेरे संतर्पित स्वप्न में जो रही कभी बनकर एक संभावना ।

यह तीर्थ..एक प्रभास नहीं…. यह वन नहीं वृंदावन
अंगारों का अंकन है यह अतिअनुभूत अनंग अतीत
यह मेघ..आषाढ़ नहीं … इस वर्षा में कहाँ है श्रावण ?
शरद के शिशिर में नहीं लुप्त होता मेरा हेमंत या शीत ।

यह ऋतु..वसंत नहीं, इस कुहूरव में है कदंब का शोक
नहीं लौटेगी फूलमती…म्लान होगा मेरा फाल्गुनी मास
यह निर्जन निदाघ स्वयं ही है निर्मम निर्मोही निर्मोक
प्रेम -पाँस समीप…करेगा क्रंदन – मेरा कल्पित कैलास ।

यह नक्षत्र नहीं है..स्वाती.. यह नदी भी है नहीं सरस्वती
मेरे शब्दों के स्कंध पर किंतु सदा रहेगी तुम्हारी स्मृति बन सती ।

मूल ओड़िआ सोनेट – श्री गिरिजाकुमार बलियारसिंह
हिन्दी अनुवाद सोनेट – श्रीमती अनिमा दास

About the author

Anima Das

श्रीमती अनिमा दास- (१५ सितंबर, १९७३) का जन्म ओड़िसा के कटक जिले में हुआ , आप एक मिशनरी इंग्लिश मीडियम स्कूल में शिक्षिका हैं। आप एक अत्यंत प्रतिभा संपन्न हिंदी कवयित्री व सोनेटियर हैं। इनकी लेखनी सोनेट्स एवं छंदमुक्त कविताओं में प्राणों का संचार कर देती है। प्रकृति, सामाजिक समस्याओं के प्रति चिंता व विशेष रूप से मृत्यु एवं प्रेम के प्रति संवेदनशीलता आपके काव्य की विशिष्टता है। हिंदी में मुख्य कार्य के रूप में 'काव्य-पुष्पांजलि' व एकल सोनेट संग्रह 'शिशिर के शतदल' के अतिरिक्त 5 साझा संग्रह भी पृष्ठबद्ध हुये हैं। काव्य संग्रह 'प्रतीची से प्राची पर्यंत' में आपने सुविख्यात ओड़िआ सोनेट रचनाकारों को हिंदी में अनूदित भी किया है।

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