नई आमद

फिटनेस के राज खोलने आई एक किताब

अश्रुतपूर्वा II

नई दिल्ली। लेखक-पत्रकार सुन्दर चन्द ठाकुर की पुस्तक ‘खुद से जीत’ का लोकार्पण पिछले दिनों हुआ। इस पुस्तक को वाणी प्रकाशन ने प्रकाशित किया है। इसका लोकार्पण वरिष्ठ पत्रकार सुधीर मिश्रा ने किया। इस मौके पर परिचर्चा भी हुई। मंच का संचालन वाणी प्रकाशन समूह की कार्यकारी निदेशक अदिति माहेश्वरी गोयल ने किया।
इस अवसर पर पुस्तक के लेखक ठाकुर ने कहा, जब फिटनेस की बात आती है तो यह बहुत जरूरी है कि हम शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य तीनों की बात करें। ठाकुर दक्षिण अफ्रीका में 90 किलोमीटर की कामरेड मैराथन समेत 50 मैराथन दौड़ चुके हैं। उन्होंने दौड़ की इसी यात्रा पर यह पुस्तक लिखी है। पुस्तक में लेखक ने अपनी फिटनेस यात्रा और उससे जुड़े अनुभव साझा किए हैं। वे अपने यूट्यूब चैनल ‘माइंडफिट’ के जरिए भी युवाओं को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक उत्थान की राह पर जाने को प्रेरित कर रहे हैं।  समूह की कार्यकारी निदेशक अदिति माहेश्वरी गोयल ने कहा कि इस किताब से स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता का नया दौर शुरू होगा।
नवभारत टाइम्स, दिल्ली के स्थानीय संपादक सुधीर मिश्रा ने कहा ने लेखक सुन्दरचन्द ठाकुर से सवाल जवाब के दौरान कहा कि ‘खुद से जीत’ किताब सिर्फ मैराथन दौड़ने की कहानी नहीं है बल्कि यह आध्यात्मिक चेतना की एक व्यक्ति के जीवन में क्या जरूरत होती है, इसे भी स्पष्ट करती है।
वाणी प्रकाशन ग्रुप की कार्यकारी निदेशक अदिति माहेश्वरी ने कहा हिंदी भाषा में स्वास्थ्य और फिटनेस पर किताबें या तो अनुदित पाई जाती है या फिर मौलिक नहीं होती है। ‘खुद से जीत’ मूल किताब है और इस पुस्तक से स्वास्थ को लेकर जागरूकता का नया दौर शुरू होगा, ऐसा हम मानते है। वाणी प्रकाशन ग्रुप द्वारा युवा और वरिष्ठ पाठकों को हम यह पुस्तस्क समर्पित कर रहे हैं।

जब लेखक खुद को जीत लेता है तो सबके लिए आती है एक किताब। इस पुस्तक में सुंदर चंद ठाकुर ने अपनी फिटनेस यात्रा और उससे जुड़े अनुभव साझा किए हैं। यहां सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान दिया गया है।

कवि-कथाकार व पत्रकार हरि मृदुल ने पुस्तक की प्रशंसा में कहा है कि कोई हिंदी कवि-कथाकार या पत्रकार सामान्य धावक बनने की भी सोचे, यह एक दुर्लभ स्थिति होती है। और फिर दक्षिण अफ्रीका की 90 किलोमीटर की विश्वविख्यात कामरेड मैराथन में सफलतापूर्वक भागीदारी, वह तो कल्पनातीत ही है!! लेकिन हिंदी के यशस्वी साहित्यकार सुन्दर चन्द ठाकुर ने यह अविस्मरणीय कारनामा कर दिखाया। स्वाभाविक रूप से इस तरह वह कॉमरेड मैराथन पूरी करनेवाले एकमात्र भारतीय लेखक होने का कीर्तिमान अपने नाम कर चुके हैं।

पुस्तक के बारे में
इस पुस्तक में सुंदर चंद ठाकुर ने अपनी फिटनेस यात्रा और उससे जुड़े अनुभव साझा किए हैं। यहां सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान दिया गया है। एक लाइफ-कोच, मित्र की तरह ठाकुर ने व्यावहारिक और सरल भाषा में आत्मविश्वास, ट्रेनिंग, योग और ध्यान पर जरूरी बातें सामने रखी हैं। जीवन क्या है? जीवन की उपलब्धियां क्या हैं? जीवन के संघर्ष, उसकी सीमाएं, उसकी अनन्तता क्या है? जब मनुष्य इन प्रश्नों पर विचार करता है तब यह वह स्थिति होती है जो उसे आत्मकेंद्रित करती है। इस स्थिति में मनुष्य स्वयं से संवाद करता है। कभी खुद को परिष्कृत करता है तो कभी स्वयं को नकार भी देता है।
इसी प्रक्रिया के द्वारा ही मनुष्य उन बिंदुओं पर अपना ध्यान लगाता है जहां वह अपने विचारों को टटोलता हुआ बाहरी प्रभावों और दबावों से स्वयं को मुक्त करता है। जिस समय मनुष्य अपने आंतरिक बंधनों से मुक्त होता है। उसी समय उसके भीतर एक नवीन और परिष्कृत मानव की निर्मिति होती है। सुन्दर चन्द ठाकुर की कृति खुद से जीत उन्हीं स्वप्नों पर जीत की कथा है जिन्हें एक सचेत मानव ही अपने साहस और बौद्धिक बल से हकीकत में बदल पाता है।

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